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E-ISSN: 2582-8010
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Volume 7 Issue 10
October 2026
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महँगाई, उपभोक्ता व्यवहार एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव
| Author(s) | डाॅ. इन्द्र सिंह |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | महँगाई आधुनिक अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक समस्याओं में से एक है। सामान्य रूप से जब किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में लगातार वृद्धि होती है, तो उसे महँगाई कहा जाता है। महँगाई का प्रभाव केवल वस्तुओं की कीमतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह लोगों की वास्तविक आय, क्रय-शक्ति, बचत, निवेश, उपभोग तथा जीवन-स्तर को भी प्रभावित करती है। विशेष रूप से निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर महँगाई का प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च होता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में महँगाई का स्वरूप अनेक कारकों से प्रभावित होता है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि, ईंधन की लागत, उत्पादन लागत, आपूर्ति में व्यवधान, वैश्विक बाजारों में कीमतों का परिवर्तन, मांग में वृद्धि और मौद्रिक परिस्थितियाँ इसके प्रमुख निर्धारकों में शामिल हैं। भारत जैसे विशाल देश में खाद्य महँगाई का विशेष महत्व है क्योंकि भोजन परिवारों के उपभोग व्यय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महँगाई उपभोक्ता व्यवहार में भी परिवर्तन लाती है। कीमतें बढ़ने पर उपभोक्ता आवश्यक और गैर-आवश्यक वस्तुओं के बीच प्राथमिकताएँ बदल सकते हैं। वे सस्ते विकल्प चुन सकते हैं, गैर-जरूरी खर्चों को कम कर सकते हैं या अपनी बचत और निवेश की रणनीति में परिवर्तन कर सकते हैं। लंबे समय तक उच्च महँगाई रहने पर लोगों की आर्थिक अपेक्षाएँ भी प्रभावित हो सकती हैं। दूसरी ओर, नियंत्रित और स्थिर मूल्य वृद्धि किसी अर्थव्यवस्था में सामान्य आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा हो सकती है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब महँगाई अत्यधिक, अस्थिर या लंबे समय तक बनी रहती है। इसलिए आर्थिक नीति के स्तर पर मूल्य स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस शोध-पत्र में महँगाई की अवधारणा, उसके कारणों तथा उपभोक्ता व्यवहार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। |
| Keywords | महँगाई, उपभोक्ता व्यवहार, भारतीय अर्थव्यवस्था, मूल्य स्तर, क्रय-शक्ति, खाद्य महँगाई, उपभोग, बचत, आय, आर्थिक विकास, मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति, मूल्य स्थिरता, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक। |
| Published In | Volume 3, Issue 10, October 2022 |
| Published On | 2022-10-06 |
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10.70528/IJLRP
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