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E-ISSN: 2582-8010   •   Impact Factor: 9.56

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भारत का सांस्कृतिक क्षरणः कारण और प्रभाव

Author(s) Suman Yadav
Country India
Abstract सदियों की सभ्यतागत निरंतरता, विविधता और बहुलवाद से आकार लेने वाली भारत की सांस्कृतिक विरासत, आधुनिकीकरण, वैश्वीकरण और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के दबाव में तेजी से क्षरण का अनुभव कर रही है। यह लेख पश्चिमीकरण, संस्कृति के व्यावसायीकरण, डिजिटल प्रभाव, भाषाई गिरावट, शहरीकरण और पारंपरिक सामाजिक संस्थानों के कमजोर होने सहित इसके प्रमुख कारणों का विश्लेषण करके भारत में सांस्कृतिक क्षरण की घटना की जांच करता है । यह भारतीय समाज पर इस क्षरण के प्रभावों की पड़ताल करता है, जैसे कि स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का नुकसान, युवाओं के बीच पहचान संकट, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का एकरूपीकरण और स्थानीय परंपराओं और भाषाओं का हाशिए पर जाना ।

इन गतिशीलता का आलोचनात्मक मूल्यांकन करके, लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे सांस्कृतिक क्षरण भारत की सामाजिक एकजुटता, अंतर-पीढ़ीगत निरंतरता और राष्ट्रीय पहचान के लिए चुनौतियाँ पैदा करता है । अध्ययन में शिक्षा, नीतिगत हस्तक्षेप, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग के माध्यम से सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आधुनिक विकास के साथ कायम रहे ।
Keywords सांस्कृतिक क्षरण, भारतीय संस्कृति, भूमंडलीकरण, पश्चिमीकरण, शहरीकरण, आधुनिकीकरण, डिजीटल मीडिया, उपभोक्तावाद, सांस्कृतिक पहचान, स्वदेशी परंपराएँ, क्षेत्रीय भाषाएँ, लोक कलाएँ, पारंपरिक मूल्य, सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक समरूपीकरण, युवा संस्कृति, अंतर-पीढ़ीगत अंतर, संस्कृति का व्यावसायीकरण, विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक विविधता
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 9, September 2026
Published On 2026-09-29

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