International Journal of Leading Research Publication
E-ISSN: 2582-8010
•
Impact Factor: 9.56
A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Monthly Scholarly International Journal
Plagiarism is checked by the leading plagiarism checker
Call for Paper
Volume 7 Issue 8
August 2026
Indexing Partners
मीरा बाई के काव्य में आध्यात्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत मुक्ति की अवधारणा
| Author(s) | शैफाली राजवाल |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | मीरा बाई मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख संत-कवयित्री थीं, जिनके काव्य में आध्यात्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत मुक्ति तथा ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम का अद्वितीय समन्वय दिखाई देता है । उनका संपूर्ण काव्य श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम भक्ति पर आधारित है, जिसमें सामाजिक बंधनों, जातिगत भेदभाव, रूढ़ियों तथा राजसी मर्यादाओं का स्पष्ट विरोध दिखाई देता है । मीरा ने अपने जीवन और काव्य के माध्यम से यह स्थापित किया कि आत्मा की वास्तविक स्वतंत्रता केवल ईश्वर-भक्ति और आत्मसमर्पण से ही संभव है । मीरा की आध्यात्मिक स्वतंत्रता का अर्थ बाहरी बंधनों से मुक्ति के साथ-साथ आंतरिक चेतना के जागरण से भी है । उन्होंने सांसारिक वैभव, पारिवारिक अपेक्षाओं और सामाजिक प्रतिबंधों को त्यागकर व्यक्तिगत आध्यात्मिक मार्ग का चयन किया । उनके पदों में कृष्ण के प्रति प्रेम केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है । यही प्रेम उन्हें निर्भयता, आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिरोध की शक्ति प्रदान करता है । व्यक्तिगत मुक्ति की अवधारणा मीरा के काव्य में आत्मानुभूति, भक्ति, प्रेम और वैराग्य के माध्यम से अभिव्यक्त होती है । उनके अनुसार मोक्ष किसी कर्मकांड, बाह्य आडंबर या सामाजिक प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि निष्कपट भक्ति, समर्पण और ईश्वर के साथ आत्मिक एकत्व से प्राप्त होता है । उनका काव्य स्त्री-अस्मिता, आध्यात्मिक समानता तथा मानव की आंतरिक स्वतंत्रता का सशक्त दस्तावेज़ है । वर्तमान समय में भी मीरा का काव्य सामाजिक समानता, आध्यात्मिक चेतना, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है । इस प्रकार मीरा बाई का काव्य केवल भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत मुक्ति के सार्वकालिक दर्शन का भी प्रभावशाली प्रतिनिधित्व करता है । |
| Keywords | भक्ति आंदोलन, आध्यात्मिक स्वतंत्रता,व्यक्तिगत मुक्ति,कृष्ण भक्ति, आत्मसमर्पण, स्त्री, वैराग्य,मोक्ष |
| Field | Arts |
| Published In | Volume 7, Issue 7, July 2026 |
| Published On | 2026-07-31 |
Share this

IJLRP's Crossref DOI prefix is
10.70528/IJLRP
Downloads
All research papers published on this website are licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License, and all rights belong to their respective authors/researchers.