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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के काव्य में विद्रोही स्वर

Author(s) अशोक कुमार धाकड़
Country India
Abstract हिंदी साहित्य के आधुनिक काल में सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का व्यक्तित्व अत्यंत विशिष्ट और क्रांतिकारी माना जाता है। वे केवल छायावादी कवि नहीं थे, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के समर्थक, रूढ़ियों के विरोधी तथा मानवीय मूल्यों के सशक्त प्रवक्ता भी थे। उनके काव्य में विद्रोह का स्वर अनेक स्तरों पर अभिव्यक्त हुआ है। उन्होंने सामाजिक विषमता, आर्थिक शोषण, जातिगत भेदभाव, धार्मिक पाखंड, नारी-असमानता तथा साहित्यिक रूढ़ियों के विरुद्ध अपनी लेखनी के माध्यम से प्रभावशाली प्रतिरोध दर्ज कराया। निराला का विद्रोह नकारात्मक या विध्वंसकारी नहीं है, बल्कि वह मानव-मुक्ति, सामाजिक न्याय और नवीन जीवन-मूल्यों की स्थापना का रचनात्मक प्रयास है। प्रस्तुत शोध-पत्र में निराला के काव्य में विद्यमान विद्रोही चेतना का सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय एवं साहित्यिक संदर्भों में विश्लेषण किया गया है।
Keywords निराला, विद्रोह, सामाजिक चेतना, छायावाद, प्रगतिशीलता, मानवीय मूल्य।
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 7, July 2026
Published On 2026-07-26

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