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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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राजेंद्र यादव और अमरकांत के उपन्यासों में बदलते भारतीय समाज और मानवीय संबंधों के संकट का आलोचनात्मक अध्ययन

Author(s) राजेश मीना, डॉ. रीतु शर्मा
Country India
Abstract हिंदी साहित्य में राजेंद्र यादव और अमरकांत ऐसे रचनाकार हैं जिन्होंने भारतीय समाज के संक्रमणकालीन यथार्थ को अत्यंत संवेदनशीलता और वैचारिक गहराई के साथ अभिव्यक्त किया। प्रस्तुत शोध आलेख “राजेंद्र यादव और अमरकांत के उपन्यासों में बदलते भारतीय समाज और मानवीय संबंधों के संकट का आलोचनात्मक अध्ययन” के माध्यम से यह विश्लेषित करने का प्रयास किया गया है कि दोनों लेखकों ने स्वतंत्रोत्तर भारतीय समाज में उत्पन्न सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा नैतिक परिवर्तनों को किस प्रकार अपने उपन्यासों में रूपायित किया है। अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य यह समझना है कि आधुनिकीकरण, नगरीकरण, मध्यवर्गीय चेतना, पारिवारिक विघटन, उपभोक्तावाद तथा बदलती सामाजिक संरचनाओं ने मानवीय संबंधों को किस प्रकार प्रभावित किया और इन परिवर्तनों का साहित्यिक प्रतिरूप इन लेखकों के कथ्य एवं शिल्प में कैसे व्यक्त हुआ। राजेंद्र यादव के उपन्यासों में मध्यवर्गीय जीवन, स्त्री-पुरुष संबंधों का तनाव, अस्तित्वगत अकेलापन तथा वैचारिक विद्रोह प्रमुख रूप से उभरते हैं, जबकि अमरकांत के साहित्य में निम्न एवं मध्यवर्गीय जीवन की करुण यथार्थपरकता, नैतिक संघर्ष, मानवीय संवेदना तथा सामाजिक विषमता का मार्मिक चित्रण दिखाई देता है। यह शोध तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक पद्धति के माध्यम से दोनों लेखकों की रचनाओं में निहित सामाजिक चेतना और संबंधों के संकट का विवेचन करेगा। अध्ययन यह स्थापित करने का प्रयास करेगा कि दोनों रचनाकारों ने बदलते भारतीय समाज की जटिलताओं को मानवीय दृष्टि से समझते हुए हिंदी उपन्यास परंपरा को नई वैचारिक दिशा प्रदान की।
Keywords यादव, अमरकांत, बदलता भारतीय समाज, मानवीय संबंध, सामाजिक चेतना, मध्यवर्ग, पारिवारिक विघटन, आधुनिकता, हिंदी उपन्यास, आलोचनात्मक अध्ययन।
Published In Volume 7, Issue 5, May 2026
Published On 2026-05-23

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