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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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मुरिया जनजातीय कौशल विकास के माध्यम से सतत आजीविका पर प्रभाव: बस्तर जिले के विशेष संदर्भ में

Author(s) Dr. देवाशीष हालदार, Mr. श्री प्रेमजीत निराला
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध “मुरिया जनजातीय कौशल विकास के माध्यम से सतत आजीविका पर प्रभाव: बस्तर जिले के विशेष संदर्भ में” मुरिया जनजाति की परम्परागत कला एवं कौशल की वर्तमान स्थिति तथा उससे जुड़ी आजीविका की संभावनाओं का विश्लेषण करता है। यह अध्ययन प्राथमिक आँकड़ों पर आधारित है, जो बस्तर जिले के चयनित ग्रामों में 100 उत्तरदाताओं से सर्वेक्षण पद्धति द्वारा संकलित किए गए हैं। शोध में उत्तरदाताओं की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, आजीविका के स्रोत, परम्परागत कौशल से जुड़ाव, आय की प्रकृति, प्रशिक्षण, बाजार उपलब्धता तथा सरकारी सहयोग जैसे पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि मुरिया जनजाति के अधिकांश परिवारों की मुख्य आजीविका कृषि पर आधारित है, जबकि परम्परागत कला एवं कौशल सीमित परिवारों के लिए ही आय का स्रोत बन पाए हैं। बाँस शिल्प, काष्ठ शिल्प, धातु शिल्प एवं पारम्परिक नृत्य जैसे कौशल अभी भी समुदाय में विद्यमान हैं, परंतु उनसे प्राप्त आय अधिकतर अनियमित एवं कुल पारिवारिक आय में सीमित योगदान देने वाली है। अधिकांश कारीगरों ने यह कौशल पारिवारिक परंपरा के माध्यम से सीखा है, जिससे औपचारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण की कमी स्पष्ट होती है।
शोध के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि कच्चे माल की कमी, बाजार तक सीमित पहुँच, उचित मूल्य न मिलना, प्रभावी प्रशिक्षण का अभाव तथा सरकारी सहयोग की कमी मुरिया जनजातीय कौशल विकास की प्रमुख बाधाएँ हैं। यद्यपि कुछ उत्तरदाता यह मानते हैं कि परम्परागत कौशल सतत आजीविका का साधन बन सकता है, परंतु वर्तमान परिस्थितियों में यह संभावना पूर्ण रूप से साकार नहीं हो पा रही है। अतः यह अध्ययन निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि यदि मुरिया जनजातीय कौशल विकास को नियमित एवं बाजारोन्मुख प्रशिक्षण, बेहतर विपणन व्यवस्था, वित्तीय सहायता तथा संस्थागत समर्थन के साथ जोड़ा जाए, तो यह न केवल सतत आजीविका का सशक्त माध्यम बन सकता है, बल्कि जनजातीय संस्कृति के संरक्षण एवं बस्तर जिले के समग्र ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Keywords मुरिया , परम्परागत, कौशल, सतत, आजीविका, रोजगार ,आत्मनिर्भरता ,ग्रामीण ,विकास
Field Sociology > Economics
Published In Volume 7, Issue 2, February 2026
Published On 2026-02-19

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