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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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सांदीपनि आश्रम : प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक औचित्यपूर्ण अध्ययन

Author(s) Ms. ज्योति यादव, Dr. प्रशांत पुराणिक
Country India
Abstract प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली में सांदीपनि आश्रम (उज्जैन) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है । यह न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि प्राचीन भारत के "गुरुकुल" मॉडल का एक आदर्श उदाहरण भी है । प्राचीन काल में उज्जैन (अवंतिका) विद्या और संस्कृति का एक प्रतिष्ठित केंद्र था । महाभारत काल के दौरान, महर्षि सांदीपनि का आश्रम एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान था, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी । यहाँ की शिक्षा 'गुरु-शिष्य परंपरा' पर आधारित थी, जो व्यक्तिगत मार्गदर्शन, आत्म-अनुशासन और व्यावहारिक शिक्षा पर बल देती थी । सांदीपनि आश्रम में केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा दी जाती थी । श्रीकृष्ण ने यहाँ मात्र 64 दिनों में 64 कलाएँ सीखीं, जिनमें वेद, शास्त्र, धनुर्विद्या (युद्ध कौशल), चिकित्सा, संगीत, चित्रकला, खगोल विज्ञान और यहाँ तक कि हाथी-घोड़ों को प्रशिक्षित करना भी शामिल था । ऐतिहासिक उल्लेखों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने 4 दिनों में 4 वेद, 6 दिनों में 6 शास्त्र, 18 दिनों में 18 पुराण और 20 दिनों में गीता का ज्ञान प्राप्त किया था । शिक्षा की पद्धति 'तपोवन' शैली पर आधारित थी, जहाँ छात्र प्रकृति के समीप रहकर सादा जीवन और उच्च विचार का पालन करते थे । आश्रम में राजकुमार (कृष्ण-बलराम) और एक निर्धन ब्राह्मण पुत्र (सुदामा) को एकसमान शिक्षा और सुविधाएं प्राप्त थीं, जो शिक्षा की निष्पक्षता को दर्शाती है ।
Keywords महर्षि सांदीपनि, कृष्ण सुदामा, गुरुकुल, उज्जैन, 'ज्ञानार्थ प्रवेश, धार्मिक, शैक्षणिक संस्थान, अनुशासन
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 1, January 2026
Published On 2026-01-26

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