International Journal of Leading Research Publication

E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 6 Issue 8 August 2025 Submit your research before last 3 days of to publish your research paper in the issue of August.

वैदिक साहित्य मे पर्यावरण संरक्षण के विविध आयाम का ऐतिहासिक विश्लेषण

Author(s) Prabhanshu Jain
Country India
Abstract भारतीय संस्कृति में पर्यावरण की अत्यधिक महत्ता रही है। हजारों वर्ष पूर्व भारतीय मनीषियों महर्षियों ने मानव जीवन के कल्याण और सुख के लिए पर्यावरण के महत्व और प्रकृति के सानिध्य के महत्व को समझा था। भारतीय संस्कृति का आधार वैदिक युग रहा है और उसका मूल स्रोत हैं वेद। वेदों के अनुशीलन से ज्ञात होता है कि वेदकालीन समाज में पर्यावरण के महत्व और उसकी रक्षा के प्रति अत्यधिक जागरूकता थी। पर्यावरण प्रदूषण के खतरों के प्रति तत्कालीन समाज काफी सचेत था। उस काल में भूमि को ईश्वर के रूप में पूजनीय माना जाता था। वेदों में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है भूमि जिसकी पादस्थानीय और अंतरिक्ष उदर के समान है और द्युलोक जिसका मस्तक है, उन सबसे बड़े ब्रह्म को नमस्कार है।' वेदों में प्रकृति और पुरुष का संबंध परस्पर एक दूसरे पर आधारित माना गया है। प्रकृति और विभिन्न वस्तुओं के अनुकूल रहन-सहन और खान-पान का सम्यक् वर्णन वेदों में मिलता है ।आज पर्यावरण प्रदूषण सम्पूर्ण विश्व में एक गंभीर समस्या है। चारों ओर प्रदूषण फैलाने वाले तत्व नजर आते हैं, उसकी रोकथाम अपेक्षाकृत नगण्य है। मानव जाति जिस दिशा की ओर अग्रसर है, उसे देखते हुए लगता है कि वह समय दूर नहीं जब समस्त जैवमंडल विनाश के मुंह में होगा।
Keywords पर्यावरण, आवरण, संरक्षण, प्रकृति, प्राकृतिक, मानव
Field Arts
Published In Volume 6, Issue 8, August 2025
Published On 2025-08-23
Cite This वैदिक साहित्य मे पर्यावरण संरक्षण के विविध आयाम का ऐतिहासिक विश्लेषण - Prabhanshu Jain - IJLRP Volume 6, Issue 8, August 2025.

Share this