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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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राजाभोजकृत ‘‘श्रृंगारप्रकाश’’-नाट्यशास्त्र में श्रृंगार रसरूपी विधाओं के प्रस्तुतीकरण का वर्णन

Author(s) दीपक गायकवाड़
Country India
Abstract परमारवंशी संस्कृत विद्वान राजा भोज द्वारा संस्कृत काव्य एवं नाट्यशास्त्र की विभिन्न विधाओं के प्रदर्शन के लिए श्रृंगारप्रकाश नामक ग्रंथ की रचना की गई। इस ग्रंथ में उन्होंने 8 रसों में से मुख्यतः श्रृंगार रस का वर्णन बड़े ही विस्तृत रूप से किया हैं, इसके विभिन्न प्रकारों का अधिक विषयवस्तु एवं सारगर्भित प्रदर्शन इस ग्रंथ को श्रंृगाररस के समस्त विधाओं में उपयोग की परिपूर्णता को दर्शाता हैं। इस ग्रंथ में भोज कहते हैं कि, पृथ्वी पर किसी अन्य रस का इतना व्यापक विस्तार नहीं हैं, जितना कि श्रृंगार का। श्रृंगार अन्य सभी भावनाओं और संवेदनाओं से ऊपर हैं, क्योंकि यह मनुष्य में सबसे महत्वपूर्ण भावना है। यह मानव मन को आकर्षित करता हैं, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मौजुद हैं, क्योंकि जीवन प्रेम और स्नेह की कभी न खत्म होने वाली खोज हैं। यह अत्यंत मधुर हैं।
Keywords परमार, संस्कृत विद्वान, राजा भोज, संस्कृत काव्य, नाट्यशास्त्र, श्रृंगारप्रकाश
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 6, June 2026
Published On 2026-06-14

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