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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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मलिन बस्तियों में जीवन स्तर का समाजषास्त्रीय अध्ययन

Author(s) मीनाक्षी मीना
Country India
Abstract यह शोध-पत्र मलिन बस्तियों (ैसनउेद्ध में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक संरचना और जीवन की गुणवत्ता जैसे पहलुओं का अध्ययन किया गया है। यह भी समझने का प्रयास किया गया है कि शहरीकरण, गरीबी और सामाजिक असमानता किस प्रकार मलिन बस्तियों के निर्माण और विस्तार में भूमिका निभाते हैं।
भारत में आवास की समस्या का सबसे बड़ा दुष्परिणाम गन्दी बस्तियों के रूप में देखने को मिलता है। यह सच है कि विष्व के सभी प्रमुख नगरों में जनसंख्या का एक बड़ा भाग मलिन और घनी बस्तियों में रहता है, लेकिन भारत में गन्दी बस्तियों की समस्या कहीं अधिक गम्भीर है। इन बस्तियों की प्रकृति को इसी तथ्य से समझा जा सकता है कि कुछ लोग इन्हें ‘नारकीय जीवन के केन्द्र‘ कहते हैं, जबकि आस्कर लेविस ने इन्हें ‘गरीबी और पतन की संस्कृति‘ के नाम से सम्बोधित किया है। अत्यधिक भीड़-भाड़, सीलन और दुर्गन्धयुक्त मकान, तंग गलियां, चारों ओर दुर्गन्धयुक्त वातावरण, नागरिक सुविधाओं का अभाव, आर्थिक तनाव, मादक पदार्थों का प्रचलन तथा अपराधी व्यवहार इन बस्तियों की सामान्य विशेषताएं हैं। औद्योगिक नगरों में दीमक की तरह बढ़ रही इन मलिन बस्तियों में मानव का जीवन अमानवीय दशाओं में व्यतीत हो रहा है।
Keywords मलिन बस्ती, झुग्गी-झोपड़ियों, अपराध, बाल अपराध ,वेश्यावृत्ति, अस्वस्थ जीवन, विचलनकारी व्यवहार, अस्वच्छता, उदासीनता, उपेक्षित क्षेत्र।
Published In Volume 5, Issue 1, January 2024
Published On 2024-01-04

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