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E-ISSN: 2582-8010
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Volume 7 Issue 4
April 2026
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आर्थिक विचार और भारतीय ज्ञान प्रणाली: दार्शनिक आधार, संस्थागत विकास और समकालीन प्रासंगिकता
| Author(s) | अर्चना पाण्डेय |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | भारतीय ज्ञान प्रणाली में आर्थिक चिंतन केवल धन-संचय या उत्पादन-वितरण के तकनीकी सिद्धांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धर्म, नैतिकता, राज्य-व्यवस्था, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा एक समग्र वैचारिक ढाँचा प्रस्तुत करता है। इस अध्याय का उद्देश्य भारतीय आर्थिक विचार की दार्शनिक जड़ों, शास्त्रीय ग्रंथों में वर्णित सिद्धांतों, संस्थागत संरचनाओं तथा आधुनिक संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता का विश्लेषण करना है। वेदों और उपनिषदों में निहित संतुलित उपभोग की अवधारणा, अर्थशास्त्र में प्रतिपादित राज्य-नियंत्रित अर्थनीति, श्रेणी-व्यवस्था की विकेंद्रीकृत आर्थिक संरचना, तथा ग्राम-आधारित आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था भारतीय चिंतन की विशिष्टताओं को रेखांकित करती हैं। साथ ही, महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित ट्रस्टीशिप सिद्धांत भारतीय परंपरा की नैतिक अर्थव्यवस्था को आधुनिक संदर्भ में पुनर्परिभाषित करता है। अध्याय यह प्रतिपादित करता है कि भारतीय आर्थिक दृष्टिकोण समावेशी, सतत और नैतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण वैचारिक आधार प्रदान कर सकता है। |
| Keywords | भारतीय ज्ञान परंपरा, अर्थशास्त्र, कौटिल्य, लोककल्याण, सतत विकास, आर्थिक नैतिकता |
| Published In | Volume 3, Issue 3, March 2022 |
| Published On | 2022-03-02 |
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