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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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मध्यप्रदेश के शैलोत्कीर्ण मंदिरो की स्थापत्यकला का संरचनात्मक एवं तुलनात्मक परिशीलन

Author(s) डॉ. उषा अग्रवाल, जितेंद्र गवरिया
Country India
Abstract भारतीय मंदिर स्थापत्य कला में शैलोत्कीर्ण मंदिर शैली प्राचीन शिल्पकारों की तकनीकी दक्षता और रचनात्मक कौशल के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन्हें एक ही एकाश्म शिला को उत्कीर्ण कर निर्मित किया जाता हैं । इस शोध पत्र में मध्य प्रदेश के प्रमुख शैलोत्कीर्ण मंदिर—धर्मराजेश्वर (मंदसौर), वासवी मंदिर (धार) तथा चतुर्भुज मंदिर (ग्वालियर) का स्थापत्य दृष्टि से अध्ययन किया गया है। जिसमें धर्मराजेश्वर मंदिर विकसित नागर शैली तथा शैव-वैष्णव परंपरा के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। वासवी मंदिर, की समचतुरश्र योजना तथा पिरामिडाकार फमसाना संरचना दक्कन की स्थापत्य परंपरा का प्रभाव दर्शाती है। वहीं चतुर्भुज मंदिर प्रतिहार कालीन स्थापत्य का महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें भगवान विष्णु से संबंधित समृद्ध प्रतिमा-अलंकरण अंकित हैं। इन मंदिरों के तुलनात्मक अध्ययन से स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश की शैलोत्कीर्ण वास्तुकला में स्थानीय परंपराओं के साथ नागर शैली एवं दक्कन की परंपराओं का समन्वय हुआ है। साथ ही, शिला की प्रकृति, उत्कीर्णन तकनीक एवं संरचनात्मक विन्यास ने इनके स्वरूप को प्रभावित किया है।
शोध पत्र में उपर्युक्त मंदिरों की वास्तु योजना, संरचनात्मक विन्यास, शिल्प अलंकरण तथा निर्माण तकनीक का विश्लेषण किया गया है। साथ ही अध्ययन हेतु प्रत्यक्ष अवलोकन, क्षेत्रीय सर्वेक्षण तथा उपलब्ध साहित्यिक एवं पुरातात्त्विक स्रोतों का उपयोग किया गया है। निष्कर्षतः, ये मंदिर स्थापत्य, संस्कृति, धर्म तथा प्राचीन स्थापत्य कौशल के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
Keywords शैलोत्कीर्ण मंदिर, मध्य प्रदेश, मंदिर वास्तुकला, नागर शैली, राष्ट्रकूट शैली, धर्मराजेश्वर मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, वासवी मंदिर।
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 4, April 2026
Published On 2026-04-08

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