International Journal of Leading Research Publication

E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 7 Issue 4 April 2026 Submit your research before last 3 days of to publish your research paper in the issue of April.

मतदान व्यवहार एवं सोशल मीडिया: बदलते आयाम और प्रवृत्तियाँ

Author(s) मनोज खीचड़
Country India
Abstract लोकतंत्र का मूल विचार यह है कि राजनीतिक सत्ता का अंतिम स्रोत जनता होती है और शासन का वैध अधिकार जनता की सहमति से निर्मित होता है। आधुनिक प्रतिनिधि लोकतंत्र में यह सहमति मुख्यतः चुनाव के माध्यम से व्यक्त होती है, जहाँ नागरिक प्रतिस्पर्धी चुनावों के जरिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। इसी दृष्टि से जोसेफ शुम्पेटर के मिनिमलिस्ट लोकतंत्र समझ को अक्सर उद्धृत किया जाता है- लोकतांत्रिक पद्धति वह संस्थागत व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति जनता के मत के लिए प्रतिस्पर्धा करके निर्णय शक्ति प्राप्त करते है। (जाल्टा, 2006) इस ढाँचे मे मतदाता केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि वह केंद्रीय इकाई है जो प्रतिनिधित्व, सत्ता हस्तातरण और जवाबदेही की पूरी प्रक्रिया को अर्थ देता है।
भारत में मतदाता की भूमिका को संविधान ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के रूप में स्पष्ट आधार प्रदान किया है। संविधान का अनुच्छेद 326 यह स्थापित करता है कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होगे अर्थात प्रत्येक भारतीय नागरिक जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है और विधि सविधान के अत्तर्गत अयोग्य नहीं ठहराया गया है, वह मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का अधिकारी है। (भारतीय संविधान, अनु 326, 1950)।
Keywords .
Field Arts
Published In Volume 6, Issue 3, March 2025
Published On 2025-03-07

Share this