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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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प्रणामी सम्प्रदाय में स्वामी लालदास का योगदान (बीतक के विशेष संदर्भ में)

Author(s) Mr. प्यारेलाल अहिरवार, Dr. राशिद खान
Country India
Abstract - 17वीं शताब्दी में महामति प्राणनाथ ने प्रणामी संप्रदाय की स्थापना की जिसने सत्तधर्म और एकेश्वरवाद के सिद्धांत को जन-जन तक पहुँचाया। इस सम्प्रदाय के प्रसार और प्रचार में उनके शिष्य स्वामी लालदास की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। स्वामी लाल दास ने बीतक नामक ग्रंथ की रचना की जो ना केवल प्राणनाथ जी के जीवन चरित्र और उपदेशों का संकलन है ,बल्कि प्रणामी संप्रदाय की दार्शनिक एवं ऐतिहासिक धरोहर भी है। स्वामी लालदास कृत बीतक का सम्बन्ध श्री देवचन्द्र जी तथा श्री प्राणनाथ जी के जीवन एवं उनके द्वारा अवतरित तारतम वाणी से हैं। भारतीय इतिहास के मध्य युग में महामति प्राणनाथ ने हिन्दू मुसलमानों के पारस्परिक धार्मिक दुर्भावना को शान्त करने का सन्देश ही नहीं दिया बल्कि हिंदुओं के धर्म ग्रन्थ वेद ,उपनिषद ,गीता, भागवत तथा मुसलमानों के धर्म ग्रन्थ कुरान, ईसाइयों के इंजील, यहूदियों के जबूर तथा दाउद पैगम्बर के अनुयायियों के धर्म ग्रन्थ तौरेत में मौलिक एकता खोजने का प्रयत्न किया। प्रस्तुत शोध-पत्र में बीतक के विशेष संदर्भ में स्वामी लाल दास के योगदान का विश्लेषण किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने प्रणामी संप्रदाय की शिक्षाओं को जनसामान्य तक पहुँचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Keywords प्रणामी संप्रदाय, स्वामी लाल दास, बीतक, सामाजिक समरसता, दार्शनिक विचार, मध्यकालीन भारत
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 1, January 2026
Published On 2026-01-21

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