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E-ISSN: 2582-8010
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Volume 7 Issue 1
January 2026
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ग्रामीण और शहरी छात्रों की स्वजागरूकता व शैक्षिक उपलब्धियों पर सामाजिक-आर्थिक स्थिति का प्रभाव
| Author(s) | नेहा वंसल, अंकित गंगवार |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | प्रस्तुत अध्ययन “ग्रामीण और शहरी छात्रों की स्वजागरूकता व शैक्षिक उपलब्धियों पर सामाजिक-आर्थिक स्थिति का प्रभाव” विषय पर केंद्रित है, जिसमें यह विश्लेषण किया गया है कि सामाजिक-आर्थिक कारक किस प्रकार विद्यार्थियों की स्वजागरूकता तथा उनकी शैक्षिक उपलब्धि को प्रभावित करते हैं। वर्तमान समय में शिक्षा केवल पाठ्यक्रमीय ज्ञान तक सीमित न रहकर व्यक्तित्व विकास, आत्मबोध और सामाजिक दक्षताओं से भी जुड़ गई है। ऐसे में स्वजागरूकता को एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक गुण माना जाता है, जो विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य, क्षमताओं और सीमाओं को समझने में सहायता करती है। यह अध्ययन ग्रामीण एवं शहरी परिवेश में रहने वाले विद्यार्थियों की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमिकृजैसे पारिवारिक आय, माता-पिता की शिक्षा, व्यवसाय, रहन-सहन की सुविधाएँ तथा शैक्षिक संसाधनों की उपलब्धताकृऔर उनके प्रभावों को समझने का प्रयास करता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के जीवन अनुभव, अवसरों और संसाधनों में स्पष्ट अंतर पाया जाता है, जिसका सीधा प्रभाव उनकी स्वजागरूकता एवं शैक्षिक उपलब्धियों पर पड़ता है। शहरी छात्रों को अपेक्षाकृत बेहतर शैक्षिक वातावरण, तकनीकी संसाधन, मार्गदर्शन एवं प्रतिस्पर्धात्मक अवसर प्राप्त होते हैं, जिससे उनकी आत्म-समझ और शैक्षिक प्रदर्शन में वृद्धि होती है। इसके विपरीत ग्रामीण छात्रों को सीमित संसाधनों, आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है, जो उनकी स्वजागरूकता के विकास और शैक्षिक उपलब्धि को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, कई ग्रामीण विद्यार्थी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उच्च स्तर की आत्मप्रेरणा और संघर्षशीलता प्रदर्शित करते हैं, जो उनके व्यक्तित्व को सुदृढ़ बनाती है। इस अध्ययन में सामाजिक-आर्थिक स्थिति को एक स्वतंत्र चर तथा स्वजागरूकता और शैक्षिक उपलब्धि को आश्रित चर के रूप में लिया गया है। शोध का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किस प्रकार आर्थिक संसाधन, सामाजिक समर्थन और शैक्षिक वातावरण विद्यार्थियों की आत्म-समझ और अकादमिक सफलता में भूमिका निभाते हैं। यह अध्ययन न केवल ग्रामीण और शहरी छात्रों के बीच तुलनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, बल्कि शिक्षा-नीति निर्माताओं, शिक्षकों और समाज के लिए उपयोगी निष्कर्ष भी प्रदान करता है। इसके निष्कर्ष शैक्षिक समानता, अवसरों की उपलब्धता तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु प्रभावी योजनाओं के निर्माण में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। |
| Keywords | ग्रामीण और शहरी, आत्म-प्रभावकारिता, सामाजिक-आर्थिक स्थिति |
| Published In | Volume 6, Issue 9, September 2025 |
| Published On | 2025-09-17 |
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10.70528/IJLRP
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