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E-ISSN: 2582-8010   •   Impact Factor: 9.56

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2014 के बाद जाति-राजनीति में परिवर्तन: एक मूल्यांकन

Author(s) नरेंद्र कुमार ढाका
Country India
Abstract 2014 के बाद भारतीय राजनीति में जाति-आधारित राजनीति की प्रकृति और दिशा में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। जहाँ पारंपरिक जाति-समूहों पर आधारित राजनीतिक लामबंदी एक समय क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की पहचान रही, वहीं 2014 के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता-संतुलन, विकास-प्रधान विमर्श, कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार, और ‘नयी सामाजिक इंजीनियरिंग’ की रणनीतियों ने जातिगत राजनीति के पैटर्न को पुनर्परिभाषित किया है। मुख्यतः भाजपा के उदय, नए ओबीसी–दलित–पिछड़े वर्ग समीकरणों का निर्माण, सबका साथ-सबका विकास जैसे नारे, और जाति-जनगणना एवं आर्थिक आरक्षण (EWS) जैसे निर्णयों ने जातिगत राजनीति को केवल पहचान-आधारित दावों से आगे बढ़ाकर कल्याण, प्रतिनिधित्व और सामाजिक गतिशीलता के नए आयामों की ओर मोड़ा है। इसके साथ ही, डिजिटल मीडिया, युवा मतदाताओं की आकांक्षाएँ, और स्थानीय बनाम राष्ट्रीय मुद्दों के संतुलन ने जाति–राजनीति को पारंपरिक स्वरूप से अलग एक बहुस्तरीय और जटिल राजनीतिक प्रक्रिया बना दिया है। यह शोध 2014 के बाद के राजनीतिक परिदृश्य में जातिगत गठबंधनों, नेतृत्व-उत्थान, नीतिगत हस्तक्षेपों और मतदाता-व्यवहार में आए परिवर्तनों का विश्लेषणात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।
Keywords राजनीति, सामाजिक इंजीनियरिंग, 2014 के बाद का भारत, ओबीसी–दलित राजनीति, राजनीतिक लामबंदी, वोट बैंक, सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, नेतृत्व परिवर्तन, मतदाता-व्यवहार.
Published In Volume 6, Issue 12, December 2025
Published On 2025-12-08
DOI https://doi.org/10.70528/IJLRP.v6.i12.1858

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