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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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मध्यप्रदेश में जैविक खेती का विस्तार और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में जैविक कृषि की संभावनाओं का विश्लेषण

Author(s) हरीश कुमार नागरिया
Country India
Abstract मध्यप्रदेश जैविक खेती के क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्य है, जिसका मुख्य ध्यान सतत कृषि पद्धतियों पर है जो सिंथेटिक रसायनों के उपयोग से बचती हैं । राज्य में लगभग 16 लाख हेक्टेयर से अधिक का प्रमाणित जैविक कृषि क्षेत्र है, जो भारत के कुल जैविक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । जैविक कृषि ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है, मुख्य रूप से रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग के कारण । यह मिट्टी में कार्बन संग्रहण को बढ़ाती है, जिससे जलवायु परिवर्तन शमन में योगदान मिलता है । जैविक खेती प्रणालियाँ पारिस्थितिकीय लचीलापन (ecological resilience) और जैव विविधता को बढ़ावा देती हैं । जैविक मिट्टी में पानी धारण करने की क्षमता अधिक होती है, जिससे फसलें सूखा और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं के प्रति अधिक प्रतिरोधी बन जाती हैं । फसल चक्र, प्राकृतिक कीट नियंत्रण और जैविक खाद (जैसे गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट) का उपयोग मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता में सुधार करता है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है । जैविक खेती ग्रामीण समुदायों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है । राज्य सरकार की पहल, जैसे 'परंपरागत कृषि विकास योजना' (PKVY) के तहत क्लस्टर-आधारित कार्यक्रम, किसानों को जैविक खेती अपनाने में मदद कर रहे हैं और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ रहे हैं । जैविक बीजों और उर्वरकों की उच्च लागत, साथ ही प्रमाणन प्रक्रिया से जुड़ी लागतें और संगठित बाजार श्रृंखलाओं की कमी, किसानों के लिए चुनौतियां हैं । किसानों में जैविक खेती की तकनीकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता और ज्ञान की कमी एक महत्वपूर्ण बाधा है ।
राज्य सरकारों को अपनी जलवायु कार्य योजनाओं (State Action Plans on Climate Change) को लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता की आवश्यकता है । मध्यप्रदेश में जैविक कृषि का विस्तार जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन और शमन के लिए एक ठोस और आशाजनक रणनीति है, जिसमें सही नीति समर्थन और बुनियादी ढांचे के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने की अपार क्षमता है ।
Keywords जैविक खेती, रासायनिक, उत्पादन, संभावनाएँ, टिकाऊ खेती, ग्रीनहाउस गैसों, जैव विविधता, जैविक खाद
Field Arts
Published In Volume 6, Issue 11, November 2025
Published On 2025-11-17
DOI https://doi.org/10.70528/IJLRP.v6.i11.1835
Short DOI https://doi.org/hbfmj6

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