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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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बघेलखंड में कांग्रेस कमेटी की स्थापना और स्वतंत्रता आन्दोलन में भूमिका

Author(s) संजय सिंह
Country India
Abstract - देश की स्वतंत्रता के संघर्ष के लिए कई संगठनों गठित हुए किन्तु उनके उद्देश्य। राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक संगठन की आवश्यकता की पूर्ति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के साथ हुई। जिसने आगे चल कर स्वतंत्रता संघर्ष में मुख्य भूमिका निभाई। भारतीय राजनीति में सक्रिय बुद्धिजीवी वर्ग, स्थानीय और क्षेत्रीय हितों के स्थान पर राष्ट्रीय हितों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष करने के लिए तत्पर थे। रीवा के छात्र उच्च शिखा के लिए प्रयाग, बनारस, लखनऊ आदि जिलें में जाते और वह ब्रिटिश भारत के विरुद्ध आंदोलनों में भाग लेते थे। सामाजिक एवं शैक्षणिक सुधारों के कारण बघेलखंड में राजनीतिक चेतना बढ़ने लगी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समिति की शाखाएं प्रान्त और जिला स्तर में भी खोली गई। सन् 1931 तक कांग्रेस के करांची के बाद बघेलखंड के लिए पृथक कांग्रेस कमेटी की गठन का निर्णय लिया गया। जिसके फलस्वरूप 30 मई 1931 को कटनी के एक धर्मशाला में बघेलखंड कांग्रेस कमेटी गठित की गई। बघेलखण्ड कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में रीवा राज्य में उत्तरदायी शासन की स्थापना की मांग की गई। सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय कांग्रेस कमेटी के नेताओं को कैद कर कठोर यातनाएं दी गई। जिसके कारण कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। बघेलखंड कमेटी के सदस्यों ने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। कहीं सत्याग्रह के रूप में, कहीं भूमिगत गतिविधियों के रूप में और कहीं ब्रिटिश शासन के विरुद्ध खुले प्रतिरोध के रूप में। जिसके लिए इन्हें कठोर यातनाएँ भी दी गई ।
Keywords भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, बघेलखंड, भारत छोड़ो आंदोलन, सामाजिक राजनीतिक प्रभाव, राष्ट्रीयता, असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन, रीवा बहोरा आंदोलन, स्वतंत्रता, संग्राम सेनानी आदि।
Field Arts
Published In Volume 6, Issue 11, November 2025
Published On 2025-11-07
DOI https://doi.org/10.70528/IJLRP.v6.i11.1818
Short DOI https://doi.org/hbfmj7

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