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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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प्रेमचन्द के साहित्य में लिंग राजनीति और आधुनिक नारीवादी पाठ

Author(s) सोनम सिंह, जयसिंह यादव
Country India
Abstract प्रेमचन्द का साहित्य भारतीय समाज में स्त्रियों की स्थिति, उनकी पीड़ा और उनके संघर्ष का एक जीवंत दस्तावेज़ है, जो आज भी आधुनिक नारीवादी विमर्श में प्रासंगिक है। उनकी कहानियाँ और उपन्यास यह दिखाते हैं कि स्त्रियाँ केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि वे समाज और राजनीति की सक्रिय भागीदार भी हो सकती थीं। निर्मला, सेवासदन, गबन और गोदान जैसे उपन्यास स्त्री-अस्तित्व की बहुआयामी जटिलताओं को सामने लाते हैं, जहाँ वे एक ओर त्याग और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति दिखाई देती हैं और दूसरी ओर प्रतिरोध और परिवर्तन की वाहक भी। प्रेमचन्द की स्त्रियाँ असमानताओं से जूझते हुए भी बराबरी और न्याय की तलाश करती हैं, जो उन्हें नारीवादी दृष्टिकोण से विशेष महत्व प्रदान करती है। उनका साहित्य घरेलू स्थान, लैंगिक भूमिकाओं और रोज़मर्रा की प्रथाओं में छिपी असमानताओं को भी उजागर करता है, जो स्त्रीवादी समाजशास्त्र के लिए महत्त्वपूर्ण आधार बनता है। औपनिवेशिक आधुनिकता और राष्ट्रवाद के संदर्भ में प्रेमचन्द ने “नई भारतीय नारी” की छवि गढ़ने का प्रयास किया, जो परम्परा और आधुनिकता के बीच संतुलन साधते हुए आत्मसम्मान और समानता की दिशा में अग्रसर होती है। उनकी रचनाएँ न केवल स्त्रियों की अधीनता और हाशियाकरण को रेखांकित करती हैं, बल्कि उनके प्रतिरोध और अधिकारों की सम्भावनाओं को भी सामने लाती हैं। इस प्रकार, प्रेमचन्द का साहित्य स्त्रियों के संघर्ष, स्वायत्तता और सामाजिक परिवर्तन की राजनीति को समझने के लिए आधुनिक नारीवादी आलोचना में एक अनिवार्य संदर्भ है।
Field Arts
Published In Volume 6, Issue 9, September 2025
Published On 2025-09-14
DOI https://doi.org/10.70528/IJLRP.v6.i9.1742
Short DOI https://doi.org/g93mnd

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