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E-ISSN: 2582-8010
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Volume 6 Issue 8
August 2025
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गांधी जी की मूल्यपरक शिक्षा की अवधारणा
Author(s) | डॉ. सुन्दर लाल, डॉ. बी पी यादव |
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Country | India |
Abstract | शिक्षा मनुष्य की नैसर्गिक चेष्टा और उसकी विकासशील प्रकृति हैं । मनुष्य आदिकाल से सीखता आ रहा है । जो कुछ उसने सीखा है, उसे शिक्षा का रूप दिया हैं । शिक्षा मानव-समाज की संचित सीच हैं । वह उसे परम्परा और परिस्थिति के अनुसार ग्रहण करता हैं । शिक्षा तो एक प्रकार की चेतना हैं, जिसे मनुष्य स्वयं प्राप्त कर सकता हैं । यह एक गतिशील विषय हैं, इसका रूप स्थिर नहीं । इसकी धारा में एक सामाजिक प्रवाह होता हैं । प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री स्ट्रेचर का कथन हैं कि शिक्षा वह है जो विद्धान के कार्यो में अन्तर ला देती हैं । शिक्षित व्यक्ति का समाज मंे दूसरे व्यक्तियों की अपेक्षा अधिक आदर होता है । वह विद्धान और अनुभवी महापुरूषों के गम्भीर विचारों को शिक्षा के कारण ही सरलता से ग्रहण कर लेता हैं । |
Published In | Volume 6, Issue 1, January 2025 |
Published On | 2025-01-04 |
Cite This | गांधी जी की मूल्यपरक शिक्षा की अवधारणा - डॉ. सुन्दर लाल, डॉ. बी पी यादव - IJLRP Volume 6, Issue 1, January 2025. |
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10.70528/IJLRP
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