International Journal of Leading Research Publication

E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 7 Issue 5 May 2026 Submit your research before last 3 days of to publish your research paper in the issue of May.

गांधी जी की मूल्यपरक शिक्षा की अवधारणा

Author(s) डॉ. सुन्दर लाल, डॉ. बी पी यादव
Country India
Abstract शिक्षा मनुष्य की नैसर्गिक चेष्टा और उसकी विकासशील प्रकृति हैं । मनुष्य आदिकाल से सीखता आ रहा है । जो कुछ उसने सीखा है, उसे शिक्षा का रूप दिया हैं । शिक्षा मानव-समाज की संचित सीच हैं । वह उसे परम्परा और परिस्थिति के अनुसार ग्रहण करता हैं । शिक्षा तो एक प्रकार की चेतना हैं, जिसे मनुष्य स्वयं प्राप्त कर सकता हैं । यह एक गतिशील विषय हैं, इसका रूप स्थिर नहीं । इसकी धारा में एक सामाजिक प्रवाह होता हैं । प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री स्ट्रेचर का कथन हैं कि शिक्षा वह है जो विद्धान के कार्यो में अन्तर ला देती हैं । शिक्षित व्यक्ति का समाज मंे दूसरे व्यक्तियों की अपेक्षा अधिक आदर होता है । वह विद्धान और अनुभवी महापुरूषों के गम्भीर विचारों को शिक्षा के कारण ही सरलता से ग्रहण कर लेता हैं ।
Published In Volume 6, Issue 1, January 2025
Published On 2025-01-04

Share this