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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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चार्वाक दर्शन और मोक्ष

Author(s) मनोज कुमारी, डॉ. सुमित कुमार शर्मा
Country India
Abstract आज के अर्थ प्रधान युग में भौतिक सुखों की चाह को लेकर जन मानस् में इस प्रकार आपाधापी मची हुई है कि उसके आगे जीवन की अन्य बातें गौण हो चली हैं। आदमी को यह होश नहीं है कि वह क्या है और कहाँ जा रहा हे? ज्यो-ज्यों वह उन्नति की ओर अग्रसर हो रहा है, जीवन की सुख-शान्ति छिनती चली जा रही है। चारों और असन्तोष और अशान्ति का वातावरण है। पुरूषार्थचतुष्टय में से केवल अर्थ और काम का वर्चस्व ही जीवन के स्वरूप को तिरोहित कर रहा है। अपवादों को छोड़कर मनुष्य धनवान बनने की फिक्र में मदहोश है। वह अहर्निश कामलिप्सा व भोगवाद का आनन्द लेने में ही प्रयत्नशील है। उसे नैतिक-अनैतिक, शुचिता और अशुचिता, अच्छा-बुरा, धर्म-अधर्म जैसे विचारों का फर्क समझ नहीं आ रहा हे। वह निरन्तर भोगवाद की ओर अग्रसर हो रहा है।
Keywords भौतिकवाद ,दर्शनशास्त्र , दार्शनिक
Field Arts
Published In Volume 4, Issue 10, October 2023
Published On 2023-10-05

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