International Journal of Leading Research Publication
E-ISSN: 2582-8010
•
Impact Factor: 9.56
A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Monthly Scholarly International Journal
Plagiarism is checked by the leading plagiarism checker
Call for Paper
Volume 7 Issue 7
July 2026
Indexing Partners
योग, ध्यान और पर्यावरणीय चेतना: आत्मविकास से प्रकृति संरक्षण तक
| Author(s) | रेखा पाण्डेय |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | योग और ध्यान न केवल आत्मिक और शारीरिक विकास के साधन हैं, बल्कि वे पर्यावरणीय चेतना को भी बढ़ावा देते हैं। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच, योग और ध्यान व्यक्ति को आंतरिक शांति और संतुलन प्रदान करते हैं, जिससे वे प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील और जागरूक बनते हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि योगिक जीवनशैली अपनाने वाले लोग अधिक पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाते हैं, जैसे कि प्लास्टिक का कम उपयोग, जैविक खेती, और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण। ध्यान प्रथाएँ व्यक्ति को वर्तमान में जीने और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देती हैं। गहरी आत्मचेतना विकसित होने से मनुष्य स्वयं को प्रकृति का अभिन्न अंग समझने लगता है, जिससे स्थायी जीवनशैली की ओर प्रवृत्ति बढ़ती है। इस प्रकार, योग और ध्यान व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ वैश्विक पर्यावरणीय संकटों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। |
| Keywords | योग, ध्यान, पर्यावरण चेतना, आत्मविकास, प्रकृति संरक्षण, स्थायी जीवनशैली, जैविक संतुलन, आध्यात्मिकता, प्राकृतिक संसाधन, हरित जीवनशैली। |
| Field | Arts |
| Published In | Volume 4, Issue 10, October 2023 |
| Published On | 2023-10-04 |
Share this

IJLRP's Crossref DOI prefix is
10.70528/IJLRP
Downloads
All research papers published on this website are licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License, and all rights belong to their respective authors/researchers.